सिविल डिफेंस अभ्यास: Operation Abhyaas 2025 की भूमिका, महत्व और राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान

भारत एक विविधतापूर्ण देश है, जो प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, बाढ़, चक्रवात से लेकर मानव-निर्मित संकटों जैसे औद्योगिक दुर्घटनाओं या आतंकवादी घटनाओं की दृष्टि से संवेदनशील है। ऐसे में, देश की जनता की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिए एक मजबूत व सक्रिय सिविल डिफेंस व्यवस्था का होना अत्यंत आवश्यक है। इसी कड़ी में, ऑपरेशन अभ्यास (Operation Abhyaas) एक ऐसा ही राष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण अभ्यास है, जो 2025 में देश की आपदा प्रतिक्रिया क्षमता को और परिष्कृत व मजबूत करने के लिए तैयार है। यह लेख ऑपरेशन अभ्यास 2025 की भूमिका, उसके बहुआयामी महत्व और आम नागरिक के लिए इसकी उपयोगिता को विस्तार से समझाएगा।

सिविल डिफेंस क्या है और ऑपरेशन अभ्यास इसका अभिन्न अंग क्यों है?

सिविल डिफेंस का अर्थ है “नागरिक सुरक्षा”। यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत युद्ध, प्राकृतिक आपदा या किसी अन्य आपातकालीन स्थिति में नागरिकों की रक्षा, उन्हें बचाव और राहत कार्यों के लिए तैयार करना以及 उनकी मदद करना शामिल है। इसका उद्देश्य जान-माल की हानि को कम से कम करना और सामान्य स्थिति शीघ्रता से लौटाना है।

ऑपरेशन अभ्यास सिविल डिफेंस का एक प्रमुख वार्षिक/द्विवार्षिक अभ्यास है, जिसे राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (SDMA) के दिशा-निर्देशों में आयोजित किया जाता है। यह केवल एक ‘प्रदर्शन’ नहीं, बल्कि एक जीवंत प्रक्रिया है जो हमारी तैयारियों, योजनाओं और दोषों की वास्तविक समय में जांच करती है।

ऑपरेशन अभ्यास 2025 के प्रमुख उद्देश्य (Key Objectives of Operation Abhyaas 2025)

2025 का ऑपरेशन अभ्यास पिछले वर्षों के अनुभवों पर आधारित होगा और भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाएगा। इसके प्रमुख उद्देश्य हैं:

  1. तैयारियों का यथार्थ परीक्षण: कागजों पर बनी योजनाओं को वास्तविक परिस्थितियों में आजमाना। क्या संसाधन पर्याप्त हैं? क्या संचार व्यवस्था प्रभावी है? इन सवालों के जवाब इसी अभ्यास से मिलते हैं।
  2. अंतर्विभागीय समन्वय को मजबूत करना: आपदा प्रबंधन में पुलिस, अग्निशमन, स्वास्थ्य विभाग, NDRF, SDRF, स्थानीय प्रशासन और सेना के बीच तालमेल जरूरी है। ऑपरेशन अभ्यास इन सभी एजेंसियों को एक मंच पर लाकर उनके协同 कौशल को निखारता है।
  3. नई तकनीकों का एकीकरण: 2025 के अभ्यास में ड्रोन्स के उपयोग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा नुकसान का आकलन, मोबाइल ऐप्स के माध्यम से अलर्ट भेजने और सोशल मीडिया का प्रभावी उपयोग जैसी आधुनिक तकनीकों का परीक्षण प्रमुखता से शामिल होगा।
  4. जन-जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी: इस अभ्यास का सबसे महत्वपूर्ण पहलू आम नागरिकों को शामिल करना है। मॉक ड्रिल, सेमिनार और प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से लोगों को यह सिखाया जाता है कि आपदा की स्थिति में कैसे व्यवहार करना है, बचाव दल की मदद कैसे करनी है और खुद को कैसे सुरक्षित रखना है।

ऑपरेशन अभ्यास 2025: संभावित संरचना और चरण (Expected Structure and Phases)

यह अभ्यास आमतौर पर कई चरणों में पूरा होता है:

  • चरण 1: योजना और तैयारी (Planning & Preparation): इसमें जोखिम वाल क्षेत्रों की पहचान, परिदृश्यों (स्केनरियो) का निर्धारण, संसाधनों का आवंटन और सभी हितधारकों के साथ बैठकें शामिल हैं।
  • चरण 2: टेबल-टॉप एक्सरसाइज (Table-Top Exercise): सभी एजेंसियां एक मेज के चारों ओर बैठकर काल्पनिक आपदा परिदृश्य पर चर्चा करती हैं और अपनी प्रतिक्रिया की रणनीति बनाती हैं। यह सैद्धांतिक तैयारी का आधार है।
  • चरण 3: मॉक ड्रिल/फुल-स्केल अभ्यास (Mock Drill/Full-Scale Exercise): यह सबसे दिखने वाला और महत्वपूर्ण चरण है। इसमें वास्तविक जगह पर, वास्तविक लोगों और उपकरणों के साथ अभ्यास किया जाता है। उदाहरण के लिए, एक स्कूल में भूकंप की ड्रिल, एक उद्योग में आग लगने की ड्रिल, या नदी किनारे बाढ़ बचाव अभ्यास।
  • चरण 4: विश्लेषण और सुधार (Debriefing & Improvement): अभ्यास के बाद, सभी भाग लेने वाले एकत्रित होते हैं और प्रदर्शन का विश्लेषण करते हैं। कमियों की पहचान की जाती है और उन्हें दूर करने के लिए सुधारात्मक कार्ययोजना बनाई जाती है।

2025 के संदर्भ में Operation Abhyaas का विशेष महत्व (Special Significance for 2025)

  1. बदलती जलवायु के प्रभाव: जलवायु परिवर्तन के कारण अप्रत्याशित और तीव्र प्राकृतिक आपदाएं (जैसे बादल फटना, अचानक बाढ़) बढ़ रही हैं। 2025 का अभ्यास इन ‘नए सामान्य’ खतरों से निपटने के लिए विशेष प्रोटोकॉल विकसित करने पर केंद्रित होगा।
  2. स्मार्ट सिटीज़ और शहरी जोखिम: देश की बढ़ती शहरी आबादी और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के मद्देनजर, ऊंची इमारतों, मेट्रो रेल networks और घनी आबादी वाले इलाकों में आपदा प्रबंधन एक नई चुनौती है। ऑपरेशन अभ्यास 2025 इन्हीं पहलुओं पर विशेष ध्यान देगा।
  3. साइबर सुरक्षा और महामारी प्रबंधन: COVID-19 महामारी ने health emergencies के प्रबंधन में नई सीख दी है। साथ ही, critical infrastructure पर साइबर हमलों का जोखिम भी एक आधुनिक चुनौती है। अभ्यास में इन गैर-पारंपरिक खतरों के elements को शामिल किया जा सकता है।
  4. ‘आत्मनिर्भर भारत’ की रीढ़: एक आत्मनिर्भर राष्ट्र वही है जो संकटの समय खुद अपनी और अपने नागरिकों की रक्षा कर सकें। ऑपरेशन अभ्यास स्थानीय स्तर पर response capability बनाकर आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में मदद करता है।

आम नागरिक के लिए Operation Abhyaas का क्या महत्व है?

एक आम नागरिक के रूप में, आप सोच सकते हैं कि यह अभ्यास सिर्फ सरकारी एजेंसियों के लिए है। परंतु ऐसा नहीं है। इसके कम से कम तीन सीधे फायदे आपको हैं:

  • ज्ञान और आत्मविश्वास: अभ्यास में भाग लेने या उसे देखने से आपको व्यावहारिक ज्ञान मिलता है। आप सीखते हैं कि आग लगने पर कैसे बाहर निकलना है, भूकंप आने पर खुद को कैसे बचाना है। यह ज्ञान भय को कम करता है और आत्मविश्वास बढ़ाता है।
  • समुदाय का निर्माण: ऐसे अभ्यास पड़ोसियों को एक साथ लाते हैं। संकट की स्थिति में अकेले नहीं, बल्कि एक समुदाय के रूप में काम करना ज्यादा प्रभावी होता है।
  • फीडबैक का अवसर: अभ्यास के दौरान, आप अपने अनुभव और सुझाव authorities तक सीधे पहुंचा सकते हैं, जिससे आपके इलाके की आपदा प्रबंधन योजना और बेहतर बन सकती है।

निष्कर्ष: सुरक्षित कल के लिए आज का अभ्यास

ऑपरेशन अभ्यास 2025 कोई सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि मानवीय सुरक्षा और सामूहिक कल्याण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता है। यह एक सतत प्रक्रिया है जो हमें याद दिलाती है कि आपदाएं अप्रत्याशित हैं, लेकिन हमारी तैयारी और प्रतिक्रिया अवश्य ही predictable और प्रभावी होनी चाहिए। यह अभ्यास हमारी सामूहिक ताकत, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और “सर्वजन हिताय” की भावना का प्रतीक है।

एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में, हमारा कर्तव्य है कि हम ऐसे अभ्यासों में सक्रिय भागीदारी निभाएं, अपने skills को निखारें और देश की सिविल डिफेंस व्यवस्था को और मजबूत बनाने में अपना योगदान दें। क्योंकि एक सुरक्षित समाज ही एक समृद्ध राष्ट्र की नींव होता है, और ऑपरेशन अभ्यास उसी नींव को गढ़ने का काम कर रहा है।

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