इंजीनियर्स डे 2025: सर एम. विश्वेश्वरैया की प्रेरणा आज की युवा पीढ़ी के लिए

हर साल 15 सितंबर को, भारत अपने सबसे महान सपूतों में से एक, भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जन्म-तिथि को इंजीनियर्स डे के रूप में मनाता है। यह सिर्फ एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति को श्रद्धांजलि है जिसने अपनी दूरदर्शिता, अटूट नैतिकता और अद्भुत इंजीनियरिंग कौशल से आधुनिक भारत की नींव रखने में अहम भूमिका निभाई।

2025 में, जब हम एक विकसित भारत (विक्सित भारत @2047) के सपने को साकार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, तब विश्वेश्वरैया जी के सिद्धांत और कार्य आज के युवा इंजीनियरों और छात्रों के लिए पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। यह लेख सिर्फ उनके जीवन के बारे में नहीं है, बल्कि उस प्रेरणा के बारे में है जो आज की युवा पीढ़ी उनसे ले सकती है।

सर एम. विश्वेश्वरैया: एक संक्षिप्त परिचय

सर एम.वी. का जन्म 15 सितंबर, 1861 को कर्नाटक के एक छोटे से गाँव मुद्दनहल्ली में हुआ था। एक साधारण परिवार से आने वाले इस बालक ने अपनी लगन और मेहनत से पूरी दुनिया में अपना नाम रोशन किया। उन्होंने मैसूर के महाराजा के मुख्य अभियंता (Chief Engineer) और later दीवान के रूप में कार्य किया।

उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में कृष्णराज सागर बांध (KRS Dam) का निर्माण, मैसूर की बाढ़ संरक्षण प्रणाली, और हैदराबाद शहर के लिए पेयजल व्यवस्था तैयार करना शामिल है। उन्हें 1955 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी नवाजा गया।

आधुनिक युग में विश्वेश्वरैया के सिद्धांतों की प्रासंगिकता

विश्वेश्वरैया सिर्फ एक इंजीनियर नहीं थे; वे एक विजनरी, एक योजनाकार और एक राष्ट्र निर्माता थे। आइए जानते हैं कि उनके जीवन के कौन-से पहलू आज के युवाओं के लिए एक मार्गदर्शक प्रकाश स्तंभ की तरह हैं।

1. समस्याओं को अवसरों में बदलने की कला

विश्वेश्वरैया ने कभी भी समस्याओं को बाधा के रूप में नहीं देखा। हैदराबाद शहर को निज़ाम के सामने पेश की गई एक चुनौती याद कीजिए: शहर में बारिश के मौसम में भयंकर बाढ़ आती थी। उन्होंने न सिर्फ एक शानदार बाढ़ संरक्षण प्रणाली डिजाइन की, बल्कि उसके लिए ‘स्वचालित स्लुइस गेट’ (Automatic Sluice Gates) का आविष्कार किया, जो अपने आप पानी के स्तर के अनुसार खुलते और बंद होते थे।

आज के युवाओं के लिए सबक: आज दुनिया जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, डिजिटल डिवाइड जैसी जटिल चुनौतियों से जूझ रही है। एक युवा इंजीनियर के रूप में, आपका काम सिर्फ नौकरी पाना नहीं, बल्कि इन समस्याओं के इनोवेटिव समाधान ढूंढना है। क्या आप ऐसा AI एल्गोरिदम बना सकते हैं जो ट्रैफिक को स्मार्ट तरीके से मैनेज करे? क्या आप एक ऐसी सस्ती तकनीक विकसित कर सकते हैं जो प्लास्टिक कचरे को रिसाइकल कर सके? विश्वेश्वरैया की तरह सोचें—हर समस्या एक इंजीनियरिंग अवसर है।

2. ‘मेक इन इंडिया’ के असली पथप्रदर्शक

विश्वेश्वरैया ‘स्वदेशी’ और ‘आत्मनिर्भरता’ के सबसे बड़े हिमायती थे। उन्होंने मैसूर में multiple industries – जैसे साबुन कारखाना, धातु कारखाना, बिजलीघर आदि की स्थापना में अग्रणी भूमिका निभाई। उनका मानना था कि देश की आर्थिक प्रगति के लिए औद्योगिकीकरण अनिवार्य है।

आज के युवाओं के लिए सबक: आज का ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्टार्टअप इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान विश्वेश्वरैया के सपने का ही विस्तार है। एक युवा होने के नाते, आपके पास अपना स्टार्टअप शुरू करने, नए उत्पादों का आविष्कार करने और वैश्विक बाजार में ‘डिजाइन्ड इन इंडिया’ का परचम लहराने का सुनहरा मौका है। उनकी सीख यह है कि असली सफलता दूसरों की तकनीक का उपभोक्ता बनने में नहीं, बल्कि अपनी तकनीक का निर्माता बनने में है।

3. अटूट नैतिकता और ईमानदारी

एक किस्सा बहुत प्रसिद्ध है। जब विश्वेश्वरैया हैदराबाद के पानी की आपूर्ति की योजना बना रहे थे, तो निज़ाम ने उनकी सेवाओं के लिए एक बहुत बड़ी राशि की पेशकश की। लेकिन विश्वेश्वरैया ने विनम्रता से इनकार कर दिया और कहा कि वे सिर्फ एक इंजीनियर का शुल्क लेंगे, जो उस जमाने में भी एक निश्चित दर थी।

आज के युवाओं के लिए सबक: आज के प्रतिस्पर्धी और कई बार भ्रष्टाचार से ग्रस्त माहौल में, नैतिकता सबसे बड़ा सशक्तिकरण है। शॉर्टकट लेने से अल्पकालिक लाभ हो सकता है, लेकिन लंबे समय तक चलने वाली प्रतिष्ठा और सम्मान सिर्फ ईमानदारी और कड़ी मेहनत से ही मिलता है। अपने करियर की नींव ईमानदारी के सिद्धांत पर रखें; यही विश्वेश्वरैया की सबसे बड़ी विरासत है।

4. जीवन भर सीखते रहना

विश्वेश्वरैया 90 साल की उम्र तक सक्रिय रहे और नई चीजें सीखते रहे। वे तकनीकी के नवीनतम विकास से हमेशा अपडेट रहते थे। उन्होंने अपनी आत्मकथा “Memoirs of my Working Life” 92 वर्ष की आयु में लिखी थी।

आज के युवाओं के लिए सबक: 21वीं सदी में, तकनीक हर 2-3 साल में बदल जाती है। आज जो आपने इंजीनियरिंग में पढ़ा है, वह 5 साल बाद पुराना हो सकता है। इसलिए, लाइफलॉन्ग लर्निंग (जीवन भर सीखते रहना) सफलता की कुंजी है। ऑनलाइन कोर्सेज, वेबिनार, और नई तकनीकों के बारे में जिज्ञासु बने रहें। अपने skill-set को constantly upgrade करते रहें।


अनुकूलित जानकारी

प्रश्न: इंजीनियर्स डे क्यों मनाया जाता है?
उत्तर: इंजीनियर्स डे भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के जन्मदिन (15 सितंबर) के अवसर पर मनाया जाता है। यह देश के इंजीनियरों के योगदान को सम्मान देने और भारत के विकास में उनकी भूमिका को celebrate करने के लिए समर्पित है। विश्वेश्वरैया जी एक महान इंजीनियर, राज्यपुरुष और आधुनिक भारत के निर्माताओं में से एक थे।

प्रश्न: सर एम. विश्वेश्वरैया के मुख्य आविष्कार कौन-से हैं?
उत्तर: सर एम. विश्वेश्वरैया के सबसे notable आविष्कार और योगदान हैं:

  1. स्वचालित स्लुइस गेट्स: हैदराबाद में बाढ़ नियंत्रण के लिए डिजाइन किए गए जो पानी के स्तर के आधार पर स्वतः काम करते थे।
  2. कृष्णराज सागर बांध (KRS Dam): कावेरी नदी पर बना यह बांध अपने समय के इंजीनियरिंग का एक अद्भुत नमूना था।
  3. ब्लॉक सिस्टम: मैसूर रियासत में एक व्यवस्थित जल आपूर्ति और जल निकासी प्रणाली की स्थापना।

निष्कर्ष: एक बेहतर कल के लिए आज का इंजीनियर

इंजीनियर्स डे 2025 सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी का एहसास है। सर एम. विश्वेश्वरैया ने हमें दिखाया कि इंजीनियरिंग सिर्फ नौकरी पाने का जरिया नहीं, बल्कि समाज की सेवा और राष्ट्र निर्माण का एक माध्यम है।

आज का युवा दुनिया के सबसे dynamic देश का नागरिक है। उसके पास संसाधन, अवसर और क्षमता है। बस जरूरत है तो विश्वेश्वरैया जैसे दिग्गजों से प्रेरणा लेने की: समस्याओं का हल ढूंढने की जिज्ञासा, कभी हार न मानने की जिद, नैतिकता पर अडिग रहने की प्रतिबद्धता और हमेशा सीखते रहने की ललक।

इस इंजीनियर्स डे पर, आइए हम संकल्प लें कि हम सिर्फ डिग्री धारक नहीं, बल्कि समस्या-समाधानकर्ता बनेंगे। हम नौकरी ढूंढने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले बनेंगे। क्योंकि यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी, सर एम. विश्वेश्वरैया जैसे महान आत्मा को।

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