असम में 5.8 तीव्रता के भूचाल के दौरान नवजात शिशुओं की रक्षा करती नर्सों की बहादुरी भरी कहानी 2025

असम, जो अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है, 2025 की एक भयावह सुबह में अचानक हिल उठा। रिक्टर स्केल पर 5.8 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया जिसने राज्य के कई हिस्सों को झकझोर दिया। इस आपदा में सबसे ज्यादा दहशत उस समय फैली जब स्थानीय अस्पतालों की इमारतें हिलने लगीं और वहां भर्ती मरीजों की जान जोखिम में पड़ गई।

लेकिन इस अराजकता के बीच कुछ ऐसे दृश्य सामने आए जिन्होंने मानवता पर भरोसा कायम रखा। एक सरकारी अस्पताल की नर्सों ने अपने जीवन को दांव पर लगाकर नवजात शिशुओं की रक्षा की। उनकी बहादुरी और मानवता की मिसाल आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन गई।


भूकंप की भयावह घड़ी

16 सितंबर 2025 की सुबह करीब 9:45 बजे असम में धरती अचानक कांप उठी। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5.8 मापी गई।

  • केंद्र बिंदु (Epicenter): सोनितपुर ज़िला
  • गहराई: लगभग 20 किलोमीटर
  • झटकों की अवधि: 30–40 सेकंड

उस वक्त लोग अपने-अपने कामों में व्यस्त थे। स्कूलों में बच्चे, दफ़्तरों में कर्मचारी, और अस्पतालों में डॉक्टर-नर्स मरीजों की सेवा कर रहे थे। अचानक धरती की इस हलचल ने हर किसी को डरा दिया।


अस्पताल का दृश्य – जहां जिंदगी और मौत के बीच खड़ी थीं नर्सें

भूकंप के झटके सबसे ज्यादा गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल (GMCH) तथा आसपास के जिला अस्पतालों में महसूस किए गए। ICU, NICU और प्रसूति वार्ड में उस समय दर्जनों नवजात शिशु भर्ती थे।

भूकंप के तेज झटकों से—

  • इनक्यूबेटर हिलने लगे
  • बिजली कुछ समय के लिए गुल हो गई
  • ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होने का डर पैदा हुआ
  • दीवारों से प्लास्टर गिरने लगा

इस अफरातफरी के बीच नर्सें घबराईं नहीं। उन्होंने तुरंत बच्चों को अपनी गोद में उठाया, ऑक्सीजन सिलेंडर सुरक्षित किया और पूरे स्टाफ को निर्देशित किया कि कैसे मरीजों को बाहर निकालना है।


नर्सों की बहादुरी – मानवता की जीवंत मिसाल

उस दिन की सबसे भावुक तस्वीरें वही थीं जब नर्सें अपने सीने से नवजात शिशुओं को चिपकाए सुरक्षित स्थान की ओर दौड़ रही थीं

  • एक नर्स ने तीन बच्चों को एक साथ गोद और बांहों में पकड़ रखा था
  • दूसरी नर्स ने ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ इनक्यूबेटर से निकले बच्चे को थामा
  • कई नर्सें खुद घायल हो गईं, लेकिन शिशुओं की सुरक्षा पहले रखी।

यहां तक कि जब दीवारों में दरारें पड़ीं और आफ्टरशॉक्स जारी रहे, नर्सें बच्चों को बाहरी मैदान में सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में जुटी रहीं।


मानवीय संवेदना का अद्भुत उदाहरण

इस घटना ने पूरे देश को भावुक कर दिया। लोग कहने लगे कि—

“डॉक्टर भगवान कहलाते हैं, लेकिन नर्सें असली फरिश्ते होती हैं।”

क्योंकि नवजात शिशु तो खुद हिल भी नहीं सकते, वे पूरी तरह देखभाल करने वालों पर निर्भर रहते हैं। और उस दिन इन नन्ही जानों की रक्षा उन्हीं नर्सों ने की।


विशेषज्ञों की राय – क्यों खास थी यह घटना?

भूकंप विशेषज्ञों ने माना कि 5.8 तीव्रता का झटका मध्यम स्तर का होता है, लेकिन अस्पतालों जैसी संवेदनशील जगहों पर इसका खतरा दोगुना हो जाता है।

  • NICU (Neonatal Intensive Care Unit) सबसे संवेदनशील क्षेत्र होता है।
  • इनक्यूबेटर, वेंटिलेटर और लाइफ़-सपोर्ट मशीनें अचानक झटकों से काम करना बंद कर सकती हैं।
  • ऐसे में मानव निर्णय क्षमता और साहस ही बच्चों को बचा सकता है।

यही कारण है कि असम की यह घटना एक प्रेरणादायक केस स्टडी बन गई है।


सरकार और समाज की प्रतिक्रिया

भूकंप के बाद राज्य सरकार ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। मुख्यमंत्री ने बयान जारी कर कहा:

  • “नर्सों और मेडिकल स्टाफ की बहादुरी को सलाम।”
  • “सरकार अस्पताल सुरक्षा मानकों की समीक्षा करेगी।”
  • “भविष्य में ऐसे हादसों के लिए आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण और मजबूत किया जाएगा।”

सोशल मीडिया पर भी लोगों ने नर्सों को “धरती की देवदूत” कहा।


सारांश

प्रश्न: असम में 2025 के भूकंप के दौरान नर्सों ने क्या किया?
उत्तर (50 शब्दों में):
2025 में असम में आए 5.8 तीव्रता के भूकंप के दौरान नर्सों ने अपनी जान जोखिम में डालकर नवजात शिशुओं को बचाया। उन्होंने इनक्यूबेटर से बच्चों को गोद में उठाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और ऑक्सीजन सप्लाई संभाली। उनकी बहादुरी ने मानवता की सच्ची मिसाल पेश की।


सीखी जाने वाली बातें

इस घटना से हमें कई सबक मिलते हैं:

  1. आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण हर अस्पताल स्टाफ के लिए अनिवार्य होना चाहिए।
  2. बैकअप पावर और ऑक्सीजन सप्लाई हर NICU और ICU में होना चाहिए।
  3. मानव साहस और निर्णय क्षमता मशीनों से कहीं अधिक मूल्यवान है।

FAQs

प्रश्न 1: असम भूकंप 2025 की तीव्रता कितनी थी?
उत्तर: यह भूकंप रिक्टर स्केल पर 5.8 तीव्रता का था।

प्रश्न 2: सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र कौन सा था?
उत्तर: सोनितपुर और गुवाहाटी इलाके में झटके सबसे ज्यादा महसूस किए गए।

प्रश्न 3: नर्सों ने शिशुओं को कैसे बचाया?
उत्तर: नर्सों ने इनक्यूबेटर से बच्चों को निकालकर अपनी गोद में लिया और ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

प्रश्न 4: इस घटना से क्या सबक मिलता है?
उत्तर: अस्पतालों में आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण और बैकअप सिस्टम होना बेहद जरूरी है।


निष्कर्ष

असम का 2025 का यह भूकंप भले ही प्राकृतिक आपदा था, लेकिन इससे जन्मी बहादुरी की कहानियां आने वाले समय तक लोगों को प्रेरित करती रहेंगी। नर्सों की यह गाथा हमें सिखाती है कि सच्चा हीरो वही होता है जो दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए अपने डर को पीछे छोड़ देता है।

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