हनुमान अष्टक 2026: हिंदी में सम्पूर्ण पाठ, अर्थ, लाभ और PDF – बजरंग बान के साथ

नमस्कार भक्तों! 2026 का वर्ष आने वाला है और आध्यात्मिक साधना के लिए यह एक नया अवसर लेकर आता है। यदि आप हनुमान जी की कृपा पाना चाहते हैं, मन की शांति और जीवन में साहस चाहते हैं, तो हनुमान अष्टक का पाठ एक शक्तिशाली साधना है। यह लेख 2026 के लिए आपकी पूर्ण मार्गदर्शिका है, जिसमें हम हनुमान अष्टक के हिंदी लिरिक्स, उसके लाभ, PDF, और साथ ही बजरंग बान और हनुमान आरती जैसे अन्य महत्वपूर्ण स्तोत्रों के बारे में भी विस्तार से जानेंगे।

हनुमान अष्टक क्या है? (Hanuman Ashtak in Hindi Lyrics)

हनुमान अष्टक एक ऐसा स्तोत्र है जिसमें हनुमान जी के गुणों, शक्ति और भक्ति का वर्णन आठ छंदों में किया गया है। ‘अष्टक’ शब्द का अर्थ है ‘आठ’। यह आठ श्लोकों की वह रचना है जो संकटों को हरने वाले, भक्तों के रक्षक और राम भक्ति में लीन हनुमान जी के स्वरूप को पूर्णतः चित्रित करती है। इन आठ छंदों में हनुमान जी की विभिन्न लीलाओं और कृपा के प्रसंगों का सुंदर वर्णन मिलता है।

हनुमान अष्टक का महत्व:
इसका पाठ करने से साधक के सभी प्रकार के भय, रोग और संकट दूर होते हैं। यह मन को शक्ति और आत्मविश्वास से भर देता है। नियमित पाठ से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और भक्त पर अपनी विशेष कृपा बनाए रखते हैं।

हनुमान अष्टक हिंदी में (Hanuman Ashtak in Hindi Lyrics)

यहाँ पर हम हनुमान अष्टक के हिंदी लिरिक्स (पाठ) प्रस्तुत कर रहे हैं। आप इसे ध्यान से पढ़ें और अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

(पूर्ण हनुमान अष्टक हिंदी अर्थ सहित)

1. बाल समय रवि भक्षि लियो, तब तीनहुं लोक भयो अंधियारो।
ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो।
देवन आनि करी बिनती तब, छांडि दियो रवि कष्ट निवारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥

अर्थ: हे हनुमान जी! बचपन में आपने सूर्य देव को फल समझकर निगल लिया था, जिससे तीनों लोकों में अंधकार छा गया। इससे संपूर्ण जगत भयभीत हो गया और यह संकट किसी के द्वारा टाला नहीं जा सका। तब सभी देवताओं ने आपसे प्रार्थना की और आपने सूर्य देव को छोड़कर उनके कष्ट को दूर किया। इस संसार में कौन ऐसा है जो आपके “संकटमोचन” नाम को नहीं जानता?

2. अंजनि पुत्र महा बलदाई, संतन के प्रभु सदा सहाई।
देवन आज्ञा पाय बैठ्यो, महा विपिन में कीन्हा डेरो।
चौंकि महामुनि साप दियो तब, चाहिए कौन बिधि बंद घेरो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥

अर्थ: हे अंजनी पुत्र! आप महान बलशाली हैं और संतों के स्वामी सदा सहायक हैं। देवताओं की आज्ञा पाकर आपने महा वन में अपना डेरा जमाया। (वहाँ) महामुनि के चौंकाने पर उन्होंने आपको शाप दे दिया, तब (आपकी शक्तियाँ बंध गईं) और किस प्रकार आप उस बंधन से मुक्त होंगे? हे कपिश्रेष्ठ! आपके संकटमोचन नाम को संसार में कौन नहीं जानता?

3. बाली की त्रास कपीस बसैं गिरि, जात महाप्रभु देखि डरो।
तुम्हरी महिमा रही न गोपा, जब राम सागर में सींधा मरो।
आज्ञा होय तब हरि आन्यो, सिय सुधा प्रद जीवन देतारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥

अर्थ: बाली के भय से सभी वानर पर्वत पर रहने लगे, महाप्रभु राम को देखकर (सुग्रीव आदि) डर गए। आपकी महिमा छिपी न रह सकी जब आप राम नाम का जाप करते हुए समुद्र में कूद पड़े। राम जी की आज्ञा होने पर आप (लंका गए और) माता सीता को पाकर उन्हें प्रसन्न किया, जो (भक्तों को) जीवन देने वाली हैं। हे कपिश्रेष्ठ! आपके संकटमोचन नाम को संसार में कौन नहीं जानता?

4. रावण त्रास दई सिय को, सब जग जानत अस सही।
राम सहाय तुम्हिन को कीन्हो, हरि अनंत कोटि सम जहीं।
का बिधि संग्राम महा भयकरो, सुनि कपीस भयो सब डरो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥

अर्थ: रावण के भय ने सीता जी को दुःख दिया, यह बात सारा संसार जानता है। आपने राम जी की सहायता की, जो करोड़ों अनंत हनुमानों के समान हैं। उस भयानक और भयंकर युद्ध का वर्णन सुनकर सभी वानर डर गए। हे कपिश्रेष्ठ! आपके संकटमोचन नाम को संसार में कौन नहीं जानता?

5. सब समय रघुपति कीन्ही सहाई, तुम्हरी महिमा रही न गाई।
जीवन पावन होत अघाए, संकट हरो हरषि उर आए।
राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥

अर्थ: आपने सदैव श्री रघुपति (राम जी) की सहायता की, आपकी यह महिमा गाने से भी नहीं रह जाती। पापों से घिरे हुए भी जीवन पवित्र हो जाता है, संकट हरने वाले हनुमान प्रसन्नता से हृदय में आ जाते हैं। हे हनुमान! राम-भक्ति रूपी अमृत आपके पास है, आप सदा रघुपति के दास बने रहें। हे कपिश्रेष्ठ! आपके संकटमोचन नाम को संसार में कौन नहीं जानता?

6. तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना, लंकेश्वर भए सब जग जाना।
जुग सहस्र जोजन पर भानू, लील्यो ताहि मधुर फल जानू।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं, जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥

अर्थ: आपके मंत्र (परामर्श) को विभीषण ने माना और वह लंका का राजा बना, यह सारा संसार जानता है। हजारों योजन दूर स्थित सूर्य को आपने एक मधुर फल समझकर पकड़ लिया। प्रभु राम की अंगूठी को मुख में रखकर आप समुद्र को लांघ गए, इसमें कोई आश्चर्य नहीं। हे कपिश्रेष्ठ! आपके संकटमोचन नाम को संसार में कौन नहीं जानता?

7. पवनसुत कीर्ति बंदन सुनत, कलि कलुष सब दूर हरत है।
सब सुख लहै तुम्हारी शरणा, सब दुःख परहरत है।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै, तासु को काज सकल शुभ होत है।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥

अर्थ: पवनपुत्र हनुमान जी की कीर्ति का बखान और भजन सुनने से कलियुग के सारे पाप दूर हो जाते हैं। जो कोई आपकी शरण में आता है, वह सभी सुख प्राप्त करता है और सभी दुःख दूर हो जाते हैं। जो मन, कर्म और वचन से आपका ध्यान लगाता है, उसके सारे कार्य शुभ हो जाते हैं। हे कपिश्रेष्ठ! आपके संकटमोचन नाम को संसार में कौन नहीं जानता?

8. संजीवन लखन जियाये, श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई, तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।
सहस बदन तुम्हरो जस गावै, अस कहि श्रीपति कंठ लगावै।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥

अर्थ: आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी को जीवित किया, जिससे श्री रघुबीर (राम जी) हर्षित होकर आपको हृदय से लगा लिया। रघुपति (राम जी) ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा, “तुम मेरे प्रिय भरत के समान भाई हो।” (उन्होंने कहा) सहस्रानन (सहस्रमुखी शेषनाग) भी आपकी यशगाथा गाएंगे, ऐसा कहकर श्री राम ने आपको गले लगा लिया। हे कपिश्रेष्ठ! आपके संकटमोचन नाम को संसार में कौन नहीं जानता?

हनुमान अष्टक के लाभ (Hanuman Ashtak Benefits)

हनुमान अष्टक का नियमित पाठ करने से अनेक चमत्कारिक लाभ प्राप्त होते हैं। आइए जानते हैं हनुमान अष्टक के मुख्य लाभ:

  1. संकटों का निवारण: यह स्तोत्र संकटमोचन हनुमान को समर्पित है, इसलिए इसका पाठ करने से हर प्रकार के मानसिक, शारीरिक और आर्थिक संकट दूर होते हैं।
  2. भय से मुक्ति: इसे पढ़ने से भूत-प्रेत, डरावने सपने और हर प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है।
  3. आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि: हनुमान जी बल और साहस के देवता हैं। उनके इस स्तोत्र का पाठ करने से मन में अद्भुत साहस और आत्मविश्वास का संचार होता है।
  4. शत्रुओं पर विजय: इसके प्रभाव से शत्रुओं का भय समाप्त होता है और विवादों में विजय प्राप्त होती है।
  5. मानसिक शांति: नियमित पाठ से मन शांत और एकाग्र होता है, तनाव और चिंता दूर होती है।
  6. सकारात्मक ऊर्जा: घर में इसके पाठ से नकारात्मक शक्तियाँ दूर भागती हैं और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।
  7. सफलता में सहायक: किसी भी प्रकार की परीक्षा, इंटरव्यू या नए कार्य की शुरुआत में इसका पाठ विशेष लाभकारी होता है।

हनुमान अष्टक PDF इन हिंदी (Hanuman Ashtak PDF In Hindi)

हम आपकी सुविधा के लिए हनुमान अष्टक की PDF तैयार कर रहे हैं। आप इस PDF को डाउनलोड करके बिना इंटरनेट के भी कहीं भी इसका पाठ कर सकते हैं। इसमें हनुमान अष्टक के हिंदी लिरिक्स स्पष्ट अक्षरों में दिए गए हैं।


(नोट: एक वेबसाइट पर, यह एक डाउनलोड लिंक होगा जो PDF फाइल को ओपन करेगा)

हनुमान अष्टक और हनुमान चालीसा (Hanuman Ashtak Chalisa)

कई भक्त हनुमान अष्टक और हनुमान चालीसा के संबंध में जानना चाहते हैं। दोनों ही हनुमान जी के शक्तिशाली स्तोत्र हैं। हनुमान चालीसा में 40 चौपाइयाँ हैं जो हनुमान जी के जीवन, गुणों और कृपा का विस्तृत वर्णन करती हैं। वहीं, हनुमान अष्टक संक्षिप्त है जिसमें 8 श्लोक हैं। many devotees इन दोनों का संयुक्त रूप से पाठ करते हैं, जिसे कभी-कभी Hanuman Ashtak Chalisa के नाम से भी जाना जाता है। दोनों का एक साथ पाठ करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

बजरंग बान: एक और शक्तिशाली स्तोत्र (Bajrang Baan PDF & Bajrang Baan Lyrics)

हनुमान अष्टक के साथ-साथ बजरंग बान भी हनुमान जी का अत्यंत प्रभावशाली और चमत्कारी स्तोत्र माना जाता है। मान्यता है कि बजरंग बान एक “बाण” की तरह काम करता है जो भक्त के सभी कष्टों और बाधाओं को तुरंत भेद देता है।

बजरंग बान और हनुमान अष्टक में अंतर:
हनुमान अष्टक हनुमान जी की स्तुति का एक भावपूर्ण स्तोत्र है, जबकि बजरंग बान में एक विशेष छंद और ताल है, इसे अक्सर तीव्र गति से पढ़ा जाता है और इसमें हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए कुछ विशेष मंत्रों का समावेश है।

आप हमारी वेबसाइट से बजरंग बान की PDF और बजरंग बान लिरिक्स भी डाउनलोड कर सकते हैं।

हनुमान आरती (Hanuman Aarti)

किसी भी भक्ति सत्र का समापन आरती के बिना अधूरा माना जाता है। हनुमान अष्टक या बजरंग बान के पाठ के बाद हनुमान आरती अवश्य गाएं या सुनें। यह हनुमान जी की कृपा को स्थिर करती है।

लोकप्रिय हनuman आरती:
“आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की…”

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2026 में हनुमान अष्टक पाठ की विशेष सलाह

  1. समय: हनुमान अष्टक का पाठ सुबह स्नान के बाद या शाम के समय करना सर्वोत्तम माना गया है।
  2. स्थान: एक स्वच्छ और शांत स्थान चुनें, अगर संभव हो तो हनुमान जी के मंदिर में बैठकर पाठ करें।
  3. नियम: मंगलवार और शनिवार का दिन हनुमान जी को विशेष रूप से प्रिय है। 2026 में इन दिनों नियमित पाठ करने से अतुलनीय लाभ प्राप्त होगा।
  4. संख्या: इसे कम से कम 1, 5, 7 या 11 बार पढ़ने का विधान है।
  5. समर्पण: पाठ के बाद हनुमान आरती अवश्य करें और प्रसाद के रूप में बेसन के लड्डू या गुड़ का भोग लगाएं।

निष्कर्ष

2026 का वर्ष आपके लिए हनुमान जी की अपार कृपा प्राप्त करने का वर्ष बने। हनुमान अष्टक एक सरल, संक्षिप्त किंतु अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है। इस लेख में हमने आपको हनुमान अष्टक के हिंदी लिरिक्सहनुमान अष्टक PDF, और हनुमान अष्टक के लाभ तो बताए ही, साथ ही बजरंग बान और हनuman आरती की भी जानकारी दी। इन सभी का नियमित पाठ करके आप अपने जीवन से सभी प्रकार के संकटों को दूर कर सकते हैं और एक सफल, सुखी और समृद्ध जीवन की ओर अग्रसर हो सकते हैं।

जय श्री राम! जय बजरंगबली!

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